शास्त्र-दान

ज्ञान आत्मा का गुण है सभी ज्ञानी या ज्ञानवान होना चाहते हैं पर स्वयं अपना ज्ञान बिना किसी स्वार्थ के बांटना नहीं चाहते जबकि भारत की परंपरा में तो बड़े निस्वार्थ भाव से अपने ज्ञान को सबके ज्ञान में परिणत करने की परंपरा अनंत काल से चली आ रही है, शास्त्र दान या ज्ञान दान करते समय हम यह भावना भाते हैं कि यदि हम स्वयं शास्त्र दान या ज्ञान दान नहीं कर पा रहे हैं तो हमने शास्त्र दान या ज्ञान दान के उद्देश्य से यह जो राशि निकाली है वह राशि उनके जीवन के काम में आए, जिनके पास शास्त्र दान या ज्ञान दान के निमित्त जो अपेक्षित धनराशि है, वह नहीं है, ऐसे लोग केवल दो कोटि के ही हो सकते हैं-- १. या तो वे साधु हो, २. या-फिर निर्धन गृहस्थ, अतः शास्त्र दान और ज्ञान दान के निमित्त निकाली गई यह राशि इन दोनों के जीवन के काम आए. यदि आप शास्त्र दान या ज्ञान-दान करते हैं, तो निश्चय मानिए कि आपके जीवन में शास्त्र और ज्ञान का संकट कभी आने वाला नहीं शास्त्र दान या ज्ञान दान की गतिविधि के रूप में हम एक ओर शास्त्रों और ग्रंथों के सृजन,, संपादन, प्रकाशन और वितरण कर जन-जन को उपलब्ध कराने का कार्य करते हैं, वहीं दूसरी ओर शास्त्रों और ग्रंथों के पठान-पाठन और स्वाध्याय का कार्य भी अखिल विश्व जैन अभियान न्यास ने इन चारों प्रकारों के दानों से सम्बंधित गतिविधियाँ चलाने का निर्णय लिया है और लंबे समय से चला भी रहा है, जिसके अद्भुत परिणाम भी मिल रहे हैं, इसलिए आइए आप सब भी हम सब के साथ मिलकर और जुड़ कर हम सब जुट जाएं भारत कीअक्षय आहार और चतुर्विध दान की अक्षुण्ण परंपरा के पोषण में. हमारी इन सभी गतिविधियों में आप स्वयं भाग लेकर, कुछ आर्थिक सहयोग नियमित रूप से या यदा-कदा किसी अवसर विशेष पर देकर कर सकते हैं

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