प्रकाशन
अखिल विश्व जैन अभियान न्यास प्रतिभाशाली नये लेखकों व शोधकर्ताओं के द्वारा रचित रचनाओं, लेखों, विचारों को समाहित करने वाली पुस्तकों के प्रकाशन में भी सहयोग करता है और इसप्रकार के सहयोग के माध्यम से उन्हें अपने जीवन में शैक्षिक और बौद्धिक रूप से उन्नत होने के अवसर भी उपलब्ध कराता है। न्यास यह भी सुनिश्चित करता है कि उस के प्रकाशन त्रुटिरहित, गुणवत्तापूर्ण, मौलिक एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले या स्तर के हों, न्यास के अब तक के प्रकाशनों ने ऐसी ख्याति बनायी भी है। न्यास की प्राथमिकता और उस की अभिरुचि विषयों में यदि कोई प्रकाशन कराना चाहता है और हमें उसका विचार और विषय-वस्तु समाज के दृष्टिकोण से उत्तम व समाज को लाभ देने वाली सिद्ध प्रतीत होती है, तो उसे अवलोकित, परीक्षित व मूल्यांकित कर व यदि आवश्यक है तो कुछ जरूरी बदलावों को सुझाकर या करवा कर न्यास उसे अपने ढंग से प्रकाशित-प्रसारित करने में बौद्धिक, आर्थिक, वैचारिक, तकनीकी आदि सभी प्रकार के यथासंभव सहयोग करता है, ताकि समाज नये-नये विचारों और दृष्टिको नित नित सम्रिद्ध्धा हो सके इस श्रृंखला के अधीन हमने डॉक्टर पत्रिका जैन की पुस्तकें प्रकाशित की हैं और आगे डॉक्टर वन्दना मेहता की निम्नांकित पुस्तकें प्रकाशित कर रहे हैं
१. जैनेतर दार्शनिक मतवाद कोष
२. जैन आगम दर्शन एवं इतिहास
३. जैन परंपरा में प्रतिलेखना
३. Sources Of Jaina Academia
समाज की जरूरत के विषयों को लेकर स्वैच्छिक भाव से समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ काम करना
आप समाज में जहां कहीं भी दृष्टि डालें तो सरकारों के द्वारा चलाए जाने वाले विभिन्न अभियानों के अनंतर भी हमें समाज के उन्नयन में समाज में विभिन्न विषयों को लेकर काम करने की निरंतर जरूरत चारों ओर दिखती है अखिल विश्व जैन अभियान न्यास ने समाज की जरूरत के विषय क्षेत्रों में काम करने के लिए स्वैच्छिक भाव से समर्पित कार्यकर्ताओं को चिन्हित कर और उनके साथ जुड़कर स्थल विशेष के अनुसार वहाँ की आवश्यकता के विषयों को चिन्हित करते हुए जगह-जगह पर अपने काम प्रारंभ करना और उन्हें अंतिम मंजिल तक पहुँचाने की दिशा में भी यथा-आवश्यकता-- स्वच्छता, सैनिटाइजेशन, शिक्षा, चिकित्सकीय सुविधा, आहार-वितरण, कम्बल-वितरण, औषधि वितरण एवं अन्य जरूरतों की दिशा में सकारात्मक पहल करना भी आरम्भ किया है, आप पूरे भारतवर्ष में जहाँ कहीं भी रहते हैं, वहाँ इस तरह की आवश्यकताओं को चिन्हित करते हुए स्वैच्छिक भाव से समर्पित कार्यकर्ताओं का समूह बनाकर अखिल विश्व जैन अभियान न्यास से जुड़कर अपने यहाँ इस तरह का काम प्रारंभ कर सकते हैं या जहाँ इस तरह के काम में न्यास के अधीन पहले से चल रहे हैं, उन में सहयोग कर सकते हैं
भक्तामर दीपार्चन साधना में मार्गदर्शन
मानव जीवन दु:ख सुख और इसके समानांतर अंधकार एवं प्रकाश से भरा हुआ है, जो पाप-पुण्य तथा असाता-साता प्रतिफलन है या परिणाम है जब कभी जीवन में दु:ख का बाहुल्य होता है या अंधकार बढ़ता है, पाप का फल अधिक बलवान होता है एवं पग-पग पर असाता मनुष्य की सामान्य अवस्था नहीं रहने देता, तब आवश्यकता होती है कि उसके जीवन में जल्दी से जल्दी प्रकाश भरे, पुण्य अपना फल दिखाये, असाता साता में बदले और अंतत: हम सुखानुभूति के मार्ग पर चल पड़ें, ऐसी विषम परिस्थिति में भक्तामर दीपार्चन साधना हमारी उस विषम परिस्थिति को सहज व आनंदमय अनुभूति में बदलने में कारक होती है, बनती है एवं विषम से विषम अवस्था समता और सहजता का रूप ले लेती है, यह भक्तामर दीपार्चन साधना पूरे संसार में जिस जिस ने की है उसकी कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान हुआ है और उसे अपना जीवन आनंद में करने का अवसर मिला है, इस साधना में हम भक्तामर के 48 श्लोकों वाले मूल पाठ को संकल्प और विसर्जन दीपकों के साथ मिलाकर कुल 50 दीपों से हम प्रभु की आराधना करते हैं, अर्चना करते हैं, इस प्रकार आराधना अर्चना करते करते जीवन का अंधकार प्रकाश में बदलने लगता है अद्भुत है यह दीपार्चन साधना. अखिल विश्व जन अभियान में इस साधना के दुर्लभ 51 चित्रों के साथ इसका हिंदी और अंग्रेजी में देवनागरी एवं विस्तारित रोमन लिपि के साथ प्रकाशन किया है ताकि अंग्रेजी बोले जाने वाले देशों में रहने वाले ही नहीं, हमारे देश में भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले या पढ़े हुए व्यक्ति भी ठीक तरह से समुचित उच्चारण के साथ भक्तामर दीपार्चन साधना कर सकें और अपने जीवन को सफल बना सकें. यदि आप भक्तामर दीपार्चन साधना पहली बार कर रहे हैं और चाहते हैं कि यह साधना ठीक तरह से संपन्न हो व इसके लिए आपको मार्गदर्शन प्राप्त हो, तो अखिल विश्व जैन अभियान न्यास अपने सहयोगियों के माध्यम से वह सहयोग आपको प्राप्त करा सकता है, इस साधना के बाद आपको होने वाले अनुभव को भी आप अन्य मित्रों के साथ यहाँ साझा कर सकते हैं, जिससे कि वे मित्र भी जिनके जीवन में आगे इस तरह का कभी संकट उपस्थित हो, तो वह भी इस साधना को करके अपने संकट को दूर कर सकें. यह एक प्रकार से भक्तामर रूप माला मंत्र की साधना है जो अपने में अद्भुत है.
१. जैनेतर दार्शनिक मतवाद कोष
२. जैन आगम दर्शन एवं इतिहास
३. जैन परंपरा में प्रतिलेखना
३. Sources Of Jaina Academia
समाज की जरूरत के विषयों को लेकर स्वैच्छिक भाव से समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ काम करना
आप समाज में जहां कहीं भी दृष्टि डालें तो सरकारों के द्वारा चलाए जाने वाले विभिन्न अभियानों के अनंतर भी हमें समाज के उन्नयन में समाज में विभिन्न विषयों को लेकर काम करने की निरंतर जरूरत चारों ओर दिखती है अखिल विश्व जैन अभियान न्यास ने समाज की जरूरत के विषय क्षेत्रों में काम करने के लिए स्वैच्छिक भाव से समर्पित कार्यकर्ताओं को चिन्हित कर और उनके साथ जुड़कर स्थल विशेष के अनुसार वहाँ की आवश्यकता के विषयों को चिन्हित करते हुए जगह-जगह पर अपने काम प्रारंभ करना और उन्हें अंतिम मंजिल तक पहुँचाने की दिशा में भी यथा-आवश्यकता-- स्वच्छता, सैनिटाइजेशन, शिक्षा, चिकित्सकीय सुविधा, आहार-वितरण, कम्बल-वितरण, औषधि वितरण एवं अन्य जरूरतों की दिशा में सकारात्मक पहल करना भी आरम्भ किया है, आप पूरे भारतवर्ष में जहाँ कहीं भी रहते हैं, वहाँ इस तरह की आवश्यकताओं को चिन्हित करते हुए स्वैच्छिक भाव से समर्पित कार्यकर्ताओं का समूह बनाकर अखिल विश्व जैन अभियान न्यास से जुड़कर अपने यहाँ इस तरह का काम प्रारंभ कर सकते हैं या जहाँ इस तरह के काम में न्यास के अधीन पहले से चल रहे हैं, उन में सहयोग कर सकते हैं
भक्तामर दीपार्चन साधना में मार्गदर्शन
मानव जीवन दु:ख सुख और इसके समानांतर अंधकार एवं प्रकाश से भरा हुआ है, जो पाप-पुण्य तथा असाता-साता प्रतिफलन है या परिणाम है जब कभी जीवन में दु:ख का बाहुल्य होता है या अंधकार बढ़ता है, पाप का फल अधिक बलवान होता है एवं पग-पग पर असाता मनुष्य की सामान्य अवस्था नहीं रहने देता, तब आवश्यकता होती है कि उसके जीवन में जल्दी से जल्दी प्रकाश भरे, पुण्य अपना फल दिखाये, असाता साता में बदले और अंतत: हम सुखानुभूति के मार्ग पर चल पड़ें, ऐसी विषम परिस्थिति में भक्तामर दीपार्चन साधना हमारी उस विषम परिस्थिति को सहज व आनंदमय अनुभूति में बदलने में कारक होती है, बनती है एवं विषम से विषम अवस्था समता और सहजता का रूप ले लेती है, यह भक्तामर दीपार्चन साधना पूरे संसार में जिस जिस ने की है उसकी कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान हुआ है और उसे अपना जीवन आनंद में करने का अवसर मिला है, इस साधना में हम भक्तामर के 48 श्लोकों वाले मूल पाठ को संकल्प और विसर्जन दीपकों के साथ मिलाकर कुल 50 दीपों से हम प्रभु की आराधना करते हैं, अर्चना करते हैं, इस प्रकार आराधना अर्चना करते करते जीवन का अंधकार प्रकाश में बदलने लगता है अद्भुत है यह दीपार्चन साधना. अखिल विश्व जन अभियान में इस साधना के दुर्लभ 51 चित्रों के साथ इसका हिंदी और अंग्रेजी में देवनागरी एवं विस्तारित रोमन लिपि के साथ प्रकाशन किया है ताकि अंग्रेजी बोले जाने वाले देशों में रहने वाले ही नहीं, हमारे देश में भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले या पढ़े हुए व्यक्ति भी ठीक तरह से समुचित उच्चारण के साथ भक्तामर दीपार्चन साधना कर सकें और अपने जीवन को सफल बना सकें. यदि आप भक्तामर दीपार्चन साधना पहली बार कर रहे हैं और चाहते हैं कि यह साधना ठीक तरह से संपन्न हो व इसके लिए आपको मार्गदर्शन प्राप्त हो, तो अखिल विश्व जैन अभियान न्यास अपने सहयोगियों के माध्यम से वह सहयोग आपको प्राप्त करा सकता है, इस साधना के बाद आपको होने वाले अनुभव को भी आप अन्य मित्रों के साथ यहाँ साझा कर सकते हैं, जिससे कि वे मित्र भी जिनके जीवन में आगे इस तरह का कभी संकट उपस्थित हो, तो वह भी इस साधना को करके अपने संकट को दूर कर सकें. यह एक प्रकार से भक्तामर रूप माला मंत्र की साधना है जो अपने में अद्भुत है.